नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यमुना को पुनर्जीवित करने के मकसद से एक बार फिर करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का उदघाटन व शिलान्यास किया. दिल्ली सरकार द्वारा श्याम विहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यमुना के पुनरुद्धार के लिए गुरुवार को जिन 8,941.22 करोड़ रुपये की लागत वाली 43 जल एवं सीवरेज परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया गया है, उनमें 2,827.11 करोड़ रुपये की दस परियोजनाओं का उद्घाटन और 6,114.11 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन सभी परियोजनाओं से दिल्ली में सीवेज के प्रबंधन में सुधार होगा और यमुना में गंदे पानी के प्रवाह को कम करने में मदद मिलेगी.
उद्घाटन की गई परियोजनाओं में चंद्रावल में 477 एमएलडी क्षमता का नया जलशोधन संयंत्र, बवाना में दो एमजीडी क्षमता का पानी रिसाइकिल करने वाला प्लांट और ओखला में 124 एमजीडी क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं. इसके अलावा, रिठाला और कोंडली के मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का रिसाइक्लिंग और अपग्रेडेशन भी किया गया है.
शिलान्यास की गई परियोजनाओं में आठ मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का रिसाइक्लिंग और अपग्रेडेशन, 29 नए छोटे एसटीपी का निर्माण, विभिन्न क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाना और घरों को सीवर कनेक्शन देना शामिल है. इसके साथ ही, पुरानी मुख्य और परिधीय सीवर लाइनों की मरम्मत एवं सुधार, सीवेज पंपिंग स्टेशन का निर्माण और मुंडका से नजफगढ़ सप्लीमेंट्री ड्रेन तक 4.5 किलोमीटर लंबी ट्रंक ड्रेन का निर्माण भी किया जाएगा.
चंद्रावल और बवाना में जल शोधन क्षमता को मजबूती: दिल्ली में पानी की आपूर्ति बेहतर बनाने के लिए चंद्रावल में 598.60 करोड़ रुपये की लागत से 477 एमएलडी क्षमता का नया जलशोधन संयंत्र तैयार किया गया है. इससे सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल, बल्लीमारान, करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर और नई दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 22 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इससे इन इलाकों में पानी की आपूर्ति अधिक भरोसेमंद होगी. इसके अलावा, बवाना के मौजूदा 20 एमजीडी क्षमता वाले जलशोधन संयंत्र में 13.48 करोड़ रुपये की लागत से दो एमजीडी क्षमता का रिसाइक्लिंग प्लांट तैयार किया गया है. इससे हर दिन दो एमजीडी अतिरिक्त उपचारित पानी उपलब्ध होगा, जिससे बवाना के जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 67,000 लोगों को लाभ मिलेगा.
ओखला में 124 एमजीडी एसटीपी, रिठाला और कोंडली प्लांट का अपग्रेडेशन
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए ओखला में 1,161 करोड़ रुपये की लागत से 124 एमजीडी क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है. यमुना एक्शन प्लान-III के तहत बने इस प्लांट में गंदे पानी को उपचारित किया जाएगा. इसके साथ ही, उपचारित पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए रखने और ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था भी की गई है.
इस परियोजना से ओखला क्षेत्र के लगभग 70 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा रिठाला फेज-I और कोंडली फेज-I, II और III के मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का सुधार और आधुनिकीकरण किया गया है. इससे सीवेज के उपचार की गुणवत्ता बेहतर होगी और संबंधित क्षेत्रों में गंदे पानी के प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत होगी. रिठाला प्लांट से लगभग 15-16 लाख और कोंडली प्लांट से लगभग 18-19 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है.
पुराने एसटीपी का अपग्रेडेशन और 29 नए विकेंद्रीकृत एसटीपी की स्थापना
सीवेज के बेहतर उपचार के लिए आठ मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के सुधार और आधुनिकीकरण पर 1,041.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें केशोपुर एसटीपी फेज-I की क्षमता 12 एमजीडी से बढ़ाकर 18 एमजीडी करना, यमुना विहार में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाना और अन्य मौजूदा प्लांट का अपग्रेडेशन शामिल है. इसके अलावा, 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से 29 नए छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और उनसे जुड़े पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे.
ये प्लांट नजफगढ़ ड्रेनेज जोन, नरेला, बवाना और दक्षिण दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में सीवेज के उपचार की व्यवस्था को मजबूत करेंगे. इन छोटे प्लांटों में स्थानीय स्तर पर गंदे पानी का उपचार किया जा सकेगा. इससे दूर-दराज के क्षेत्रों, अनधिकृत कॉलोनियों और गांवों में सीवेज प्रबंधन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. इन परियोजनाओं के तहत ऐसे क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी को एकत्र कर उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी.
सीवर नेटवर्क का विस्तार, घरेलू कनेक्शन और बेहतर स्वच्छता
दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में सीवर नेटवर्क का विस्तार करने और घरों को सीवर कनेक्शन देने के लिए 1,691.22 करोड़ रुपये की लागत से 12 परियोजनाएं शुरू की जाएंगी. इनमें टिकरी कलां, ताजपुर खुर्द, पल्ला, खेड़ा खुर्द, बाजितपुर ठाकरान, औचंदी, कंझावला, मोहम्मदपुर माजरी, छतरपुर एक्सटेंशन, जौनापुर और महिपालपुर सहित अन्य क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाने और घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने के काम शामिल हैं.
इन परियोजनाओं से कई कॉलोनियों और गांवों में गंदे पानी को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करने और उसका उपचार करने की सुविधा विकसित होगी. उदाहरण के तौर पर, टिकरी कलां में लगभग 80.99 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने और 23,592 घरों को सीवर कनेक्शन देने की योजना है. ताजपुर खुर्द में लगभग 212.75 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई जाएगी और 73,356 घरों को कनेक्शन देने का प्रावधान है. वहीं, पल्ला और खेड़ा खुर्द में लगभग 86 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने और 19,500 घरों को सीवर कनेक्शन देने की योजना है. इन कार्यों का उद्देश्य घरों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नालों में जाने से रोकना, स्वच्छता में सुधार करना और सीवेज को संबंधित ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाकर उसका उपचार सुनिश्चित करना है. इससे स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाने और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी.
बारापुला और चिराग दिल्ली ड्रेन के सीवेज का प्रबंधन
यमुना में बिना उपचारित गंदा पानी जाने से रोकने के लिए ड्रेन और सीवेज पंपिंग स्टेशन से जुड़ी परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं. बारापुला ड्रेन से सीवेज को रोककर उपचार के लिए ओखला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई है. इसके तहत बाटला हाउस फेज-II में 35 एमजीडी क्षमता का सीवेज पंपिंग स्टेशन और उससे जुड़ी पाइपलाइन बनाई गई है.
यह परियोजना 145.18 करोड़ रुपये की संशोधित स्वीकृत लागत से पूरी हुई है. वहीं, चिराग दिल्ली ड्रेन से बहने वाले सीवेज को रोकने के लिए 13.44 करोड़ रुपये की लागत से 15 एमजीडी क्षमता का सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा. इससे चिराग दिल्ली ड्रेन से बारापुला ड्रेन और फिर यमुना में पहुंचने वाले गंदे पानी को रोकने में मदद मिलेगी. इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीवेज को उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद करना है.
द्वारका और जनकपुरी में पुरानी सीवर लाइनों का पुनर्वास
राजधानी की मौजूदा सीवरेज व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए द्वारका और जनकपुरी में ट्रंक एवं परिधीय सीवर लाइनों के पुनर्वास की तीन परियोजनाओं पर 29.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इन क्षेत्रों की कुछ सीवर लाइनें लगभग चार दशक पुरानी हैं और बार-बार क्षतिग्रस्त होने या धंसने की समस्या का सामना कर रही हैं. इन लाइनों के पुनर्वास से उनकी उपयोगी अवधि बढ़ाने, सीवेज के सुचारु प्रवाह को सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर स्वच्छता संबंधी समस्याओं को कम करने में सहायता मिलेगी.
ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अंतर्गत 225.02 करोड़ रुपये की लागत से मुंडका हॉल्ट स्टेशन से नजफगढ़ सप्लीमेंट्री ड्रेन तक 4.5 किलोमीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का निर्माण किया जाएगा. यह परियोजना क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है.






















































