नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में मजबूत आर्थिक लचीलापन विकसित किया है. अब अगला कदम इन क्षमताओं को उच्च उत्पादकता, बेहतर रोजगार और व्यापक अवसरों में बदलना है, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था लंबे समय तक चलने वाली अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर रही है.
नई दिल्ली में 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने आर्थिक लचीलेपन को परिभाषित किया. उन्होंने कहा कि यह भविष्य के व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त नीतिगत गुंजाइश बनाए रखते हुए, विकास की रफ्तार को खोए बिना झटकों को सहने की क्षमता है. उन्होंने कहा कि लचीलेपन का असली प्रमाण अक्सर उन संकटों में छिपा होता है जो सामने नहीं आ पाते, जिनमें बेकाबू महंगाई, ईंधन की कमी, बैंकिंग तनाव या जबरन वित्तीय सुधार शामिल हैं.
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत पिछले चार वर्षों के झटकों से अपने मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए बाहर निकला है. उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि, अगस्त 2026 में 4.82 प्रतिशत की खुदरा महंगाई (CPI), जीडीपी के 0.5 प्रतिशत का चालू खाता घाटा (CAD) और लगभग 766 बिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का हवाला दिया.
आर्थिक लचीलेपन के छह स्तंभ
निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज जो आर्थिक लचीलापन दिखाई दे रहा है, वह साल 2014 के बाद से उठाए गए कई कदमों की बदौलत बना है. इनमें कल्याणकारी योजनाओं को समाज के आखिरी व्यक्ति तक बेहतर ढंग से पहुंचाना, वित्तीय सेवाओं तक अधिक पहुंच, बुनियादी ढांचे का निर्माण, नीतिगत सुधार, आर्थिक स्थिरता और राजकोषीय विवेक शामिल हैं.
उन्होंने जन धन, आधार और मोबाइल ढांचे तथा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की खास तौर पर सराहना की. उन्होंने कहा कि इन प्रणालियों ने आम परिवारों की आर्थिक झटकों को झेलने की क्षमता को बेहद मजबूत किया है. उन्होंने सरकार की प्रमुख योजनाओं का भी जिक्र किया, जिनमें पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना शामिल हैं.
वित्तीय लचीलेपन के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले लोन स्वीकृत किए गए हैं. इसके साथ ही, बैंकिंग क्षेत्र के सुधारों और ईसीएलजीएस (ECLGS) जैसी योजनाओं ने वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भी कर्ज के प्रवाह को बनाए रखने और व्यवसायों व रोजगार को सुरक्षित रखने में मदद की. उन्होंने आगे जोड़ा कि अगस्त 2026 में गैर-खाद्य ऋण में सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है.
वित्त वर्ष 2026-27 में 12.22 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय
निर्मला सीतारमण ने कहा कि बुनियादी ढांचे में किए गए निवेश ने भारत की उत्पादक क्षमता का काफी विस्तार किया है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय बजटीय रूप से आवंटित किया है. वहीं, पूंजीगत संपत्तियों के अनुदान सहित प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 4.4 प्रतिशत अनुमानित है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 61 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, चालू हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है और प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो संभालने की क्षमता में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि भारतीय रेलवे ने साल 2014 से 2026 के बीच 36,429 किलोमीटर नए ट्रैक बिछाने का काम पूरा किया है.
राजकोषीय सूझबूझ सबसे महत्वपूर्ण
वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के आर्थिक झटकों से निपटने की सरकारी क्षमता को बनाए रखने के लिए राजकोषीय अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत बजटीय निर्धारित किया गया है. वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि भारत का सामान्य सरकारी कर्ज साल 2026 में जीडीपी के 83.4 प्रतिशत से घटकर 2031 तक 77.7 प्रतिशत पर आ जाएगा.
उन्होंने कहा कि भारत के विकास के अगले चरण में पिछले एक दशक में तैयार की गई इन क्षमताओं को उच्च उत्पादकता, बेहतर रोजगार और व्यापक अवसरों में बदलना ही मुख्य लक्ष्य होना चाहिए.
स्किलिंग की रफ्तार बढ़ानी होगी
भविष्य की ओर देखते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब एक स्थायी विशेषता बन चुकी है. भारत को लगातार अपने को मजबूत करना होगा. उन्होंने स्किल डेवलपमेंट को एक प्रमुख प्राथमिकता बताया, विशेष रूप से ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकें कामकाज की जगहों और रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स के स्वरूप को बदल रही हैं.
वित्त मंत्री ने युवाओं और मौजूदा कर्मचारियों से अपनी क्षमताओं को अपग्रेड करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी, अप्रेंटिसशिप और वर्कप्लेस लर्निंग के माध्यम से ट्रेनिंग प्रोग्राम डिजाइन करने में उद्योगों को बड़ी भूमिका निभानी होगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल और एआई (AI) स्किल्स को पेशेवर ज्ञान और व्यावहारिक सूझबूझ के साथ जोड़ना बेहद जरूरी है.
रणनीतिक स्वायत्तता और क्रिटिकल मिनरल्स
वित्त मंत्री ने रणनीतिक संसाधन सुरक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि केवल लागत दक्षता को ध्यान में रखकर तैयार की गई सप्लाई चेन कई बार छिपी हुई कमजोरियां या जोखिम पैदा कर सकती हैं. उन्होंने रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता को बढ़ाने के प्रयासों के तहत राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को रेखांकित किया. इसके साथ ही, उन्होंने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात भी कही.
आरएंडडी पर विशेष ध्यान
सीतारमण ने अनुसंधान (रिसर्च) और नवाचार के क्षेत्र में निजी निवेश को और मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में वर्तमान में आरएंडडी (R&D) पर होने वाला खर्च जीडीपी का केवल 0.83 प्रतिशत है, जबकि ओईसीडी (OECD) देशों में यह 2.7 प्रतिशत है. इसके साथ ही, भारत के कुल आरएंडडी खर्च में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी केवल 36 प्रतिशत है.
उन्होंने कहा कि सरकार की 1 लाख करोड़ रुपये की ‘अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना’ का उद्देश्य इसी समीकरण को बदलना है, ताकि भारत को ‘मेड इन इंडिया’ से ‘इमेजिंड एंड मेड इन इंडिया’ की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके.
वैश्विक खुलापन भी है जरूरी
वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक लचीलेपन का मतलब दुनिया से अलग-थलग हो जाना नहीं है. उन्होंने ऐसे वैश्विक आर्थिक संबंधों की वकालत की जो खुले, पूर्वानुमानित और नियमों पर आधारित हों. उन्होंने देशों से अपील की कि वे व्यापार, निवेश, ऊर्जा और पूंजी के प्रवाह को स्थिर रखते हुए अपनी साझेदारियों में विविधता लाएं.
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष इस बात की परीक्षा लेंगे कि भारत आम परिवारों और व्यवसायों को बिना किसी बड़े व्यवधान के झटकों को सहने में कितना सक्षम है. उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक लचीलेपन के इस रिकॉर्ड को मुख्य विकास आंकड़ों की तरह ही आर्थिक प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाना चाहिए.























































