नई दिल्ली: देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जल्द ही NEET-UG री-एग्जाम का परिणाम जारी करने की तैयारी में जुटी हुई है। NTA के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, NEET-UG री-एग्जाम का रिजल्ट 20 जुलाई तक घोषित किया जा सकता है। हालांकि एजेंसी की ओर से अभी परिणाम जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। रिजल्ट को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच लगातार उत्सुकता बनी हुई है। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया भी परिणाम जारी होने के बाद ही आगे बढ़ेगी। ऐसे में लाखों अभ्यर्थी अपने स्कोर और रैंक का इंतजार कर रहे हैं।
NTA के एक सीनियर अधिकारी ने टेलीफोन पर बातचीत में ANI को बताया, ‘अधिकारी ने बताया कि NTA युद्ध स्तर पर काम कर रही है ताकि अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द परिणाम उपलब्ध कराया जा सके। परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और एजेंसी पूरी पारदर्शिता के साथ रिजल्ट जारी करने पर ध्यान दे रही है।’
NTA के एक सीनियर अधिकारी ने टेलीफोन पर बातचीत में ANI को बताया, “हम अभी कोई तारीख नहीं बताना चाहते, लेकिन नतीजे 20 जुलाई तक आ जाएंगे। आम तौर पर, परीक्षा के 45 दिनों के भीतर नतीजे घोषित किए जाते हैं, लेकिन इस बार, चूंकि हमने 37 दिनों में परीक्षा आयोजित की है, इसलिए हम नतीजे बहुत पहले घोषित कर देंगे।”
रिजल्ट के बाद काउंसलिंग
रिजल्ट घोषित होने के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ), AIIMS, JIPMER, केंद्रीय और डीम्ड विश्वविद्यालयों की काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी करेगी। वहीं, 85 प्रतिशत राज्य कोटा की काउंसलिंग का शेड्यूल संबंधित राज्य सरकारें अलग-अलग जारी करेंगी। काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों को ऑनलाइन पंजीकरण कर अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और कोर्स भरने होंगे। सीटों का आवंटन NEET रैंक, आरक्षण, श्रेणी, पसंद और सीटों की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद चयनित छात्रों को दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
गौरतलब है कि इस वर्ष आयोजित NEET-UG परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों के कारण चर्चा में रही थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने कुछ केंद्रों पर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का फैसला लिया था। री-एग्जाम 21 जून को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच आयोजित किया गया था। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया था। पेपर लीक के आरोपों के बाद 20 लाख से ज़्यादा छात्रों के लिए 3 मई को हुई परीक्षा रद्द कर दी गई थी।





























































