नई दिल्ली: सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से श्रीकृष्ण की पूजा, उपवास और मंत्र जाप करने से सुख-समृद्धि, संतान सुख और शुभ मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। आषाढ़ मास की मासिक जन्माष्टमी भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ मास की मासिक जन्माष्टमी का व्रत जुलाई के दूसरे सप्ताह में रखा जाएगा।
आषाढ़ मास की कृष्ण जन्माष्टमी कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की कृष्ण जन्माष्टमी तिथि 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को दोपहर 12:06 बजे शुरू होगी और 8 जुलाई 2026 (बुधवार) को दोपहर 12:40 बजे समाप्त होगी। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (निशीथ काल) में माना जाता है, इसलिए मासिक जन्माष्टमी का व्रत 7 जुलाई 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
आषाढ़ मास की कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार मासिक जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए निशीथ पूजा मुहूर्त 8 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि 12:06 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा। यह लगभग 40 मिनट का विशेष समय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए सबसे शुभ माना गया है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विधि
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें। इसके बाद दिनभर सात्विक आचरण रखें तथा संभव हो तो फलाहार करें। रात में शुभ मुहूर्त के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और तुलसी दल, माखन, मिश्री, दूध, दही, फल और पंजीरी का भोग लगाएं। इसके बाद श्रीकृष्ण चालीसा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और अंत में आरती कर अपनी पूजा संपूर्ण करें।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम
- मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि श्रीकृष्ण की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।
- पूजा के समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।
- इस दिन सात्विक भोजन करें और क्रोध, असत्य तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
इस व्रत का पारण अगले दिन पूजा और प्रसाद वितरण करने के बाद करें।
हिंदू धर्म के अनेक प्राचीन ग्रंथों में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, नारद पुराण, व्रतराज और हरिभक्तिविलास जैसे ग्रंथ इस व्रत की महिमा का उल्लेख करते हैं। विशेष रूप से हरिभक्तिविलास में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को वैष्णव परंपरा के प्रमुख धार्मिक आचरणों में से एक माना गया है, जिसे श्रद्धा और विधिपूर्वक करने का विशेष महत्व बताया गया है।






























































