नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध में बिना पायलट वाले हवाई वाहनों यानि ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की बढ़ती भूमिका के बीच भारतीय वायु सेना ने देश में एक अलग ड्रोन फोर्स बनाने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्ट किया कि ड्रोन तकनीक वायु सेना के लिए कोई अचानक या क्रांतिकारी बदलाव नहीं है, बल्कि यह दशकों से चल रही प्रक्रिया का ही एक क्रमिक विकास है। उन्होंने स्वदेशी लड़ाकू विमान, LCA तेजस मार्क 1A की डिलीवरी में हो रही देरी पर भी बात की।
अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं
अलग ड्रोन फोर्स बनाने के सवाल पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि लोइटरिंग म्यूनिशन दुश्मन के इलाके में भ्रम पैदा करने और उनके एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने में बहुत असरदार साबित होते हैं। लेकिन जहां तक अलग ड्रोन फोर्स का सवाल है, भारतीय वायु सेना के पास ये क्षमताएं दशकों से हैं। वायु सेना के लिए ड्रोन कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं, बल्कि धीरे-धीरे होने वाला विकास है।
उन्होंने आगे बताया कि एयर फोर्स लगातार ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की संख्या, प्रकार और हमला करने की क्षमता के मामले में अपना भंडार बढ़ा रही है। लेकिन क्या इसके लिए अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत है? ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढांचे का अहम हिस्सा बने रहना चाहिए और अन्य साधनों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। सटीक नतीजे पाने के लिए ड्रोन को अन्य पारंपरिक हथियारों के साथ तालमेल बिठाकर काम करने की जरूरत है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि किसी भी एक तरह के हथियार सिस्टम का दूसरों से अलग होकर काम करना व्यावहारिक नहीं है। इसीलिए अलग फ़ोर्स बनाने पर विचार भी नहीं किया गया है। हालांकि इस काम के लिए खास यूनिट्स हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।
तेजस Mk-1A की डिलवरी में देरी पर भी बोले
HAL द्वारा LCA तेजस Mk-1A की डिलीवरी में देरी से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने माना कि देरी उम्मीद से कहीं ज्यादा है और कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि इसका असर एयर फोर्स पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि IAF की योजना के तहत, MiG-21 को सालों पहले ही हटा दिया जाना चाहिए था, लेकिन मौजूदा हालात के कारण उन्हें रिटायर करने का आखिरी चरण पिछले साल ही पूरा हुआ।
कमी को पूरा करने के लिए Mk-1A, MRFA और तेजस Mk-2 पर उम्मीदें
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि एयर फोर्स के कई चल रहे प्रोग्राम भविष्य की क्षमता की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर तेजस Mk-1A, MRFA और तेजस Mk-2 का ज़िक्र किया। इसके अलावा उन्होंने AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोग्राम को भी महत्वपूर्ण बताया, हालांकि इसे शुरू होने में अभी वक्त लगेगा।
IAF चीफ ने कहा कि इन डिफेंस प्रोग्राम्स को समय पर आगे बढ़ाने के लिए पूरे देश’ के साथ मिलकर काम करने का तरीका जरूरी है और असल में ऐसा हो भी रहा है। एयर फोर्स एक इस्तेमाल करने वाले के तौर पर पूरा सहयोग दे रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि ADA और HAL इन प्रोजेक्ट्स को पूरा कर लेंगे क्योंकि वे डेडलाइन को पूरा करने पर पूरी तरह ध्यान दे रहे हैं।























































