नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा सरकार को निर्देश दिया कि वह नेत्रहीन व्यक्ति जापा भुए और उनकी 80 साल की मां राधिका भुए को सभी पात्र सामाजिक सुरक्षा लाभ और बेसिक सुविधाएं तुरंत दे. शीर्ष कोर्ट ने उनके ‘सम्मानजनक गुजारे’ को लेकर चिंता जताई. बताया गया कि मां-बेटे बेहद गरीबी में जी रहे हैं.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने “बेहद गरीबी में रहने वाले दिव्यांग नागरिकों के लिए बुनियादी मानवीय सम्मान और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अन्य सहायक मुद्दों” शीर्षक वाले मुद्दे पर स्वतः संज्ञान से दर्ज मामले की सुनवाई की.
यह मामला मीडिया रिपोर्ट्स से शुरू हुआ, जिसमें ओडिशा के सुबर्णपुर जिले के बागड़िया गांव के रहने वाले जापा भुए और उनकी बूढ़ी मां की बुरी हालत के बारे में बताया गया था. रिपोर्ट्स में बताया गया था कि वे कई कल्याणकारी योजनाओं के लाभों के हकदार होने के बावजूद एक टूटे-फूटे घर में रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा राज्य विधि सेवा प्राधिकरण (OSLSA) के सदस्य सचिव अरविंद पटनायक को परिवार से निजी तौर पर बात करने का निर्देश दिया.
ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राधिका भुए को हर महीने 3,500 रुपये पेंशन मिल रही है, जबकि जापा भुए को विकलांगता पेंशन के तौर पर 3,500 रुपये मिल रहे है. उन्हें सरकारी स्कीम के तहत मुफ्त चावल भी मिल रहा है. पीठ ने यह भी जानकारी मांगी कि क्या राधिका भुए को बुढ़ापे की पेंशन दी गई है, भुगतान कितना हुआ है, और बकाया राशि जारी की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्देश जारी करते हुए दोनों के सम्मानजनक जीवन-यापन पर चिंता जताई. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दिए गए कल्याणकारी उपायों पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट मांगी.
पीठ ने कहा, “हालांकि, हम जापा भुए और उनकी मां की जीविका और सम्मानजनक जीवन के बारे में चिंतित हैं… ओडिशा सरकार और उसके अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि राधिका भुए और उनके बेटे जापा भुए को अगले आदेश तक सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.”
राज्य सरकार के वकील ने पीठ को बताया कि राधिका भुए को एक घर दिया गया है और जापा भुए के भाइयों को भी घर दिए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की बातें रिकॉर्ड कीं और अधिकारियों को अतिरिक्त मुख्य सचिव रैंक से नीचे के अधिकारी के जरिये एक विस्तृत हलफनामा सत्यापित करने और फाइल करने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने उन दूसरे सामाजिक सुरक्षा लाभों और कल्याणकारी योजनाओं – केंद्रीय और राज्य दोनों – की भी जानकारी मांगी हैं जिनकी वह हकदार हैं और क्या उन्हें बढ़ाया गया है.
जन्म से अंधे जापा भुए के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग पेंशन और दूसरे कल्याणकारी लाभों के उनके अधिकार के बारे में बताने का निर्देश दिया, साथ ही यह भी पुष्टि करने को कहा कि क्या वे उन्हें दिए गए हैं.
पीठ ने जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण से कहा कि वे राधिका भुए या उनके बेटे को तुरंत जरूरी मेडिकल मदद के लिए चीफ मेडिकल ऑफिसर के साथ समन्यव करें. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जापा भुए को पैरा-लीगल वॉलंटियर के तौर पर रखा जाए ताकि वे दिव्यांग लोगों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक कर सकें.
जापा को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत राज्य द्वारा अधिसूचित की गई न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं मानदेय दिया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में, जापा भूए अलग घर के लिए पात्र लगते हैं कोर्ट ने कानूनी सेवा प्राधिकरण को लागू स्कीम के तहत मामले की जांच करने और जरूरत पड़ने पर सरकार के साथ इसे आगे बढ़ाने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में तय की है. पीठ ने राज्य सरकार और OSLSA दोनों से अलग-अलग स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा, जिसमें उन्हें दिए गए सभी सामाजिक सुरक्षा उपायों की जानकारी हो.


























































